क्रिप्टो पर TDS और टैक्स: भारत में पूरा हिसाब

क्रिप्टो के भारतीय टैक्स नियम में दो नंबर हैं, और दोनों वैसे काम नहीं करते जैसा पहली बार सुनकर लगता है। 1% TDS मुनाफ़े पर नहीं, सौदे की पूरी रक़म पर कटता है। और 30% वाला टैक्स ऐसा है जिसमें आपका घाटा आपके मुनाफ़े को कम नहीं करता। इन दोनों को न समझने का नतीजा यह होता है कि साल के आख़िर में लोग हैरान बैठे होते हैं कि बराबरी पर होकर भी टैक्स कैसे बन गया। और अगर आप बाइनेंस P2P से ख़रीदते हैं तो एक तीसरी बात भी है, जो भारतीय एक्सचेंज के आदी लोगों को अक्सर बहुत देर से पता चलती है: वहाँ TDS आपके लिए कोई नहीं काटता — वह ज़िम्मेदारी ख़रीदार की अपनी है। यह पन्ना तीनों को खोलकर रखता है, फ़ॉर्म और तारीख़ों समेत।
यह सब आयकर नियमों के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार है और यह टैक्स सलाह नहीं है — अपनी स्थिति के लिए CA से पूछें। नियम बदलते रहते हैं, और आपका मामला किसी बारीकी पर टिका हो सकता है जो यहाँ नहीं है।
1% TDS: किस रक़म पर लगता है
Income-tax Act, 2025 की Section 393(1) — उसकी Table में Sl. No. 8 वाली पंक्ति, हिस्सा (vi) — कहती है कि जब कोई VDA यानी वर्चुअल डिजिटल एसेट, जिसमें क्रिप्टो और NFT आते हैं, का transfer होता है, तो पैसा देने वाला consideration का 1% काटकर सरकार के पास जमा करेगा। यही प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से पहले 1961 वाले क़ानून की Section 194S था; नंबर बदला है, काम वही है — इसलिए पुराने लेखों में 194S दिखे तो यही समझिए। मक़सद टैक्स वसूलना नहीं था, निशान छोड़ना था: हर सौदे पर एक कटौती दर्ज होती है, जिससे विभाग के पास यह रिकॉर्ड बनता रहे कि कौन कितना कारोबार कर रहा है। असल टैक्स की गणना बाद में, ITR में होती है।
अब वह हिस्सा जहाँ लगभग हर नया इंसान ग़लत समझता है। यह 1% आपके मुनाफ़े पर नहीं, सौदे की पूरी क़ीमत पर लगता है। मुनाफ़ा हुआ, घाटा हुआ या बिलकुल बराबरी रही — TDS को इससे कोई मतलब नहीं। हिसाब सीधा है:
यानी ₹1,00,000 का transfer हुआ तो TDS = ₹1,000, चाहे उस सौदे में ₹20,000 का मुनाफ़ा हुआ हो या ₹20,000 का घाटा। (आयकर नियमों के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार; यह टैक्स सलाह नहीं है — अपनी स्थिति के लिए CA से पूछें।)
| सौदे की रक़म | उस सौदे में क्या हुआ | 1% TDS |
|---|---|---|
| ₹20,000 | ₹3,000 का मुनाफ़ा | ₹200 |
| ₹20,000 | ₹3,000 का घाटा | ₹200 |
| ₹1,00,000 | बराबरी, कुछ नहीं बना | ₹1,000 |
टेबल की तीसरी लाइन पर एक पल रुकिए। कुछ कमाया नहीं, फिर भी ₹1,000 कट गया। जो लोग दिन में कई बार ख़रीद-बेच करते हैं, उनके लिए यह छोटा सा 1% धीरे-धीरे पूँजी छीलता रहता है — दस चक्कर लगाए तो दस बार कटा। लंबे समय तक रखने वाले पर यह मार बहुत कम पड़ती है, और यही इस नियम का सबसे कम बोला जाने वाला असर है।
राहत की बात यह है कि TDS आख़िरी टैक्स नहीं है। जो कटा है वह आपके PAN पर जमा होता है और आपके नाम वाले टैक्स स्टेटमेंट में दिखता है — अभी जो ITR भरी जा रही है (AY 2026-27) उसके लिए वह Form 26AS है, और 1 अप्रैल 2026 से हुए लेन-देन नए नियमों के तहत Form 168 (AIS) में दिखेंगे, जो 2027 वाली ITR के वक़्त आपके सामने आएगा। ITR भरते वक़्त यह रक़म आपकी कुल देनदारी में से घट जाती है, और ज़्यादा कट गया हो तो रिफ़ंड बनता है। यानी यह पैसा गया नहीं, अटका है — पर उसे वापस पाने के लिए रिटर्न भरना पड़ेगा। अपनी असली रक़मों पर हिसाब देखना हो तो TDS · टैक्स कैलकुलेटर में डालकर देख लीजिए।
₹10,000 और ₹50,000 वाली लिमिट
हर छोटे सौदे पर TDS न लगे, इसके लिए नियम में एक सीमा रखी गई है — और वह सबके लिए एक जैसी नहीं है:
| आप कौन हैं | financial year में लिमिट |
|---|---|
| specified person — व्यक्ति या HUF: पिछले financial year में कारोबार का turnover ₹1 crore से ऊपर न गया हो, या पेशे की receipts ₹50 lakh से ऊपर न गई हों; या कारोबार/पेशे से कोई आमदनी हो ही नहीं | ₹50,000 |
| बाक़ी सब — कंपनी, फ़र्म, और वे व्यक्ति जो ऊपर वाली परिभाषा में नहीं आते | ₹10,000 |
पहली पंक्ति को ध्यान से पढ़िए, क्योंकि वह उससे चौड़ी है जितनी आम तौर पर समझी जाती है। सिर्फ़ सैलरी वाला इंसान तो इसमें आता ही है, पर छोटी दुकान चलाने वाला या फ़्रीलांस काम करने वाला भी आ सकता है — शर्त यह है कि पिछले साल कारोबार का turnover ₹1 crore के अंदर रहा हो या पेशे की receipts ₹50 lakh के अंदर। यानी «कारोबारी आमदनी है तो ₹10,000 वाली लिमिट लगेगी» मान लेना ग़लत है। आपकी अपनी स्थिति किस पंक्ति में बैठती है, यह आपकी आमदनी के ढाँचे पर टिका है, और यही तय करने के लिए CA है।
यह एक सौदे की नहीं, पूरे financial year की जोड़ है। ₹9,000 वाला एक सौदा अकेला छोटा है, पर साल भर में ऐसे कई कर लिए तो जोड़ सीमा पार कर जाएगा।
सीमा पार होते ही TDS पूरी रक़म पर लगता है, सिर्फ़ ऊपर वाले हिस्से पर नहीं। यह income tax के slab जैसा नहीं है, जहाँ सिर्फ़ ऊपर का हिस्सा ऊँची दर पर जाता है। यहाँ दरवाज़ा पार किया तो पूरा सौदा दायरे में है।
ठीक सीमा पर कटौती नहीं होती। नियम की भाषा «इस रक़म से ऊपर न जाए» वाली है — साल की जोड़ ठीक ₹50,000 (या ₹10,000) रही तो TDS शून्य रहेगा; कटौती तभी शुरू होती है जब जोड़ इस आँकड़े से आगे निकले।
(आयकर नियमों के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार; यह टैक्स सलाह नहीं है — अपनी स्थिति के लिए CA से पूछें।)
बाइनेंस P2P पर कौन काटेगा
यहाँ से वह हिस्सा शुरू होता है जो भारतीय ऐप से आने वाले लोगों को चौंकाता है। CoinDCX या WazirX जैसे भारतीय एक्सचेंज पर आपको TDS की चिंता नहीं करनी पड़ती — वे बीच में खड़े होकर ख़ुद काटते हैं, ख़ुद जमा करते हैं, और आपको बस स्टेटमेंट मिल जाता है। बाइनेंस P2P पर ऐसा नहीं होता। वहाँ सौदा दो लोगों के बीच सीधा है और प्लेटफ़ॉर्म सिर्फ़ escrow रखता है — इसलिए काटने की ज़िम्मेदारी उस पर आती है जो पैसा दे रहा है, यानी ख़रीदार पर, आप पर।
कहने में यह एक लाइन है, करने में इतना:
- सेलर का PAN लीजिए — इसके बिना आप फ़ॉर्म भर ही नहीं पाएँगे, और PAN न मिलने पर नियमों में कहीं ऊँची दर से काटने का प्रावधान है;
- कुल रक़म का 1% काटिए — मुनाफ़े का नहीं, पूरी consideration का;
- जमा कीजिए और Form 141 का Schedule D भरिए — जिस महीने में कटौती की, उस महीने के ख़त्म होने से 30 दिन के अंदर। यह challan-cum-statement है, यानी इसी के साथ पैसा भी जाता है। VDA वाला हिस्सा Schedule D है — यही पहले अलग से Form 26QE हुआ करता था;
- सेलर को Form 132 दीजिए — Form 141 की आख़िरी तारीख़ से 15 दिन के अंदर। यह सेलर का सर्टिफ़िकेट है कि उसका TDS कटकर जमा हो चुका है, और यह पहले Form 16E कहलाता था। इसे आप हाथ से नहीं बनाते: यह TRACES पोर्टल से generate होता है, और Form 141 भर लेने के बाद ही बनेगा — इसीलिए इसकी 15 दिन वाली गिनती Form 141 की आख़िरी तारीख़ से चलती है, सौदे की तारीख़ से नहीं।
एक अच्छी ख़बर यह है कि specified person के तौर पर आपको इस रास्ते के लिए TAN नहीं लेना पड़ता — Form 141 PAN से ही भरा जाता है। पर बाक़ी काम आपका ही है, और तारीख़ें असली हैं। महीने के आख़िर से 30 दिन का मतलब है कि 5 तारीख़ को किया सौदा हो या 28 को, गिनती उसी महीने के ख़त्म होने से चलेगी।
(आयकर नियमों के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार; यह टैक्स सलाह नहीं है — अपनी स्थिति के लिए CA से पूछें।)
पुराने 26QE और 16E अब कहाँ गए
अगर आप यह काम पहले कर चुके हैं, या कोई पुराना लेख पढ़कर पोर्टल पर 26QE ढूँढने गए हैं, तो एक बात जान लीजिए: 1 अप्रैल 2026 से, यानी financial year 2026-27 से, वह फ़ॉर्म अलग से रहा ही नहीं। Income-tax Act, 2025 लागू होने के साथ चार अलग-अलग challan-cum-statement फ़ॉर्म समेटकर एक कर दिए गए हैं — और VDA वाला 26QE उन्हीं चार में से एक था। हिंदी में यह बात अब तक लगभग कहीं नहीं लिखी गई, इसलिए लोग पुराने नाम पर अटके रह जाते हैं।
| पहले जो फ़ॉर्म था | किस काम के लिए | अब वही काम कहाँ |
|---|---|---|
| 26QC | किराया | Form 141 — Schedule A |
| 26QB | प्रॉपर्टी की ख़रीद | Form 141 — Schedule B |
| 26QD | कॉन्ट्रैक्टर/प्रोफ़ेशनल को पेमेंट | Form 141 — Schedule C |
| 26QE | VDA यानी क्रिप्टो | Form 141 — Schedule D |
यानी क्रिप्टो वाले के लिए बदलाव इतना है कि अब फ़ॉर्म का नाम Form 141 है और उसमें Schedule D चुनना है। एक बार में एक ही Schedule भरा जाता है, इसलिए P2P के TDS के लिए बाक़ी तीन से आपका कोई वास्ता नहीं। समय-सीमा वही पुरानी है — कटौती वाले महीने के ख़त्म होने से 30 दिन — यह हिस्सा नहीं बदला।
सर्टिफ़िकेट वाले फ़ॉर्म भी इसी तरह सिमटे हैं: 16B, 16C, 16D और 16E — चारों की जगह अब एक Form 132 है, जो Section 395(4) के तहत आता है। यहाँ एक बात है जो पहले भी कई लोग ग़लत करते थे और अब भी करेंगे: यह सर्टिफ़िकेट आप ख़ुद टाइप करके सेलर को नहीं भेज सकते। यह TRACES पोर्टल से generate होता है, और तब तक नहीं बनेगा जब तक Form 141 भर न दिया जाए। इसीलिए 15 दिन की गिनती सौदे की तारीख़ से नहीं, Form 141 की आख़िरी तारीख़ से चलती है — पहले फ़ाइलिंग, फिर सर्टिफ़िकेट, इसी क्रम में।
अब वह सवाल, जो नाम बदलते ही सबसे पहले आता है: मैं तो अभी ITR भर रहा हूँ, मुझे कौन सा फ़ॉर्म देखना है? दोनों जवाब एक साथ सही हैं, बस अलग-अलग साल के हैं। जो P2P ख़रीद आपने आज की है, यानी 1 अप्रैल 2026 के बाद, उसका TDS Form 141 से जमा होगा और सर्टिफ़िकेट Form 132 मिलेगा। पर इस वक़्त जो ITR भरी जा रही है वह पिछले financial year की कमाई की है — उस हिस्से पर पुराना ढाँचा ही चलता है। नया फ़ॉर्म आ जाने का मतलब यह नहीं कि पिछले साल का काम भी नए नाम से दोबारा होगा।
यही परत उस स्टेटमेंट पर भी है जिसमें आप देखते हैं कि आपके नाम कितना TDS जमा हुआ। अभी वाली ITR (AY 2026-27) के लिए वह Form 26AS ही है। और 1 अप्रैल 2026 से हुए लेन-देन नए नियमों के तहत Form 168 (AIS) में दिखेंगे — यानी वे आपके सामने तब आएँगे जब 2027 में उस साल की ITR भरेंगे। दोनों नाम अगले कुछ महीनों तक साथ-साथ चलेंगे, और यही वह जगह है जहाँ लोग एक-दूसरे को ग़लत सलाह देते मिलेंगे। सीधा तरीक़ा यह है कि हर बार पूछ लीजिए: बात किस financial year की हो रही है?
नंबर बदलने से आपकी ज़िम्मेदारी कम या ज़्यादा नहीं हुई — 1% वही है, 30 दिन वही हैं, ख़रीदार की ज़िम्मेदारी वही है। बदला सिर्फ़ यह है कि पोर्टल पर किस नाम से जाना है। सीधे आधिकारिक जानकारी देखनी हो तो आयकर विभाग के अपने पन्ने हैं: Form 141 का पेज, उसका Form 141 का आधिकारिक पेज, आयकर विभाग का फ़ॉर्म सेक्शन, और TDS compliance वाला सेक्शन। जो वहाँ लिखा है वही आख़िरी है — यह पन्ना उसे समझने में मदद भर करता है।
टैक्स का हिसाब बचा नहीं सकते, फ़ीस का बचा सकते हैं। इनवाइट कोड BN6971 से रजिस्टर कीजिए, ट्रेडिंग फ़ीस पर 20% छूट मिलती है — और कोड सिर्फ़ रजिस्टर करते वक़्त ही लगता है, बाद में नहीं जुड़ता। रजिस्टर करने से पहले देख लें कि आपके इलाके में बाइनेंस उपलब्ध है या नहीं।
बाइनेंस पर रजिस्टर करें · 20% छूट30% टैक्स और घाटे का नियम
TDS वह पर्ची है जो रास्ते में कटती है; असली टैक्स यह है। मौजूदा प्रावधानों के तहत VDA के transfer से हुई आमदनी पर एकसमान 30% लगता है, साथ में लागू surcharge और cess। यह वही दर है जो पुराने क़ानून की Section 115BBH से आई थी और 2025 वाले क़ानून में भी जारी है — फ़ॉर्म के नंबर बदले हैं, यह दर नहीं। न slab, न कोई रियायती दर — ₹5,000 कमाए हों या ₹5 लाख, दर वही रहेगी।
इस नियम की तीन धाराएँ हैं, और तीनों वही हैं जिन पर लोग फिसलते हैं:
- ख़रीद की क़ीमत के अलावा कुछ भी नहीं घटा सकते। एक्सचेंज की फ़ीस, इंटरनेट, आपका लैपटॉप, वह पेड ग्रुप जिसने टिप बेची थी — कोई ख़र्च नहीं गिना जाएगा। हिसाब सिर्फ़ बिक्री की क़ीमत में से ख़रीद की क़ीमत घटाकर बनता है।
- घाटा मुनाफ़े से नहीं घटता। एक सिक्के में हुआ घाटा दूसरे सिक्के के मुनाफ़े को कम नहीं करेगा — दोनों क्रिप्टो होने के बावजूद नहीं। सैलरी या दूसरी आमदनी से घटाने का तो सवाल ही नहीं।
- घाटा अगले साल भी नहीं ले जा सकते। शेयरों में जो carry forward का सहारा मिलता है, यहाँ नहीं है। साल ख़त्म, घाटा ख़त्म।
यह पढ़ने में तकनीकी लगता है, इसलिए एक हिसाब देखिए। मान लीजिए आपने साल में दो सौदे किए:
| सौदा | नतीजा | टैक्स की गिनती में |
|---|---|---|
| पहला | ₹50,000 का मुनाफ़ा | 30% लगेगा = ₹15,000 |
| दूसरा | ₹50,000 का घाटा | कोई राहत नहीं, न इस साल न अगले |
| जोड़ | ₹0 — आप बराबरी पर | फिर भी ₹15,000 का टैक्स |
टेबल की आख़िरी लाइन ही इस पूरे पन्ने का सबसे ज़रूरी वाक्य है: आप बराबरी पर हैं और टैक्स फिर भी बनता है। जेब से देखें तो आप साल भर में घाटे में गए — ₹15,000 का, बिना कुछ कमाए। इसीलिए बहुत सारे सौदे करना यहाँ दोहरी मार है: हर बिक्री पर 1% TDS कटता है, और हर मुनाफ़े वाले सौदे पर 30% चढ़ता है जबकि घाटे वाले चुपचाप निगल लिए जाते हैं। स्क्रीन पर दिखने वाला मुनाफ़ा और जेब में पहुँचने वाला मुनाफ़ा एक चीज़ नहीं है — प्रतिशत का पूरा गणित प्रॉफ़िट-लॉस का प्रतिशत कैसे निकालें में खोला गया है, और उसके ऊपर यह परत बैठती है। यह आयकर नियमों के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार है; यह टैक्स सलाह नहीं है — अपनी स्थिति के लिए CA से पूछें।
न काटा तो क्या होता है
मान लीजिए P2P पर आपने TDS काटा ही नहीं, या काट तो लिया पर जमा नहीं किया। नियमों में इसके लिए तीन परतें हैं, और वे एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती हैं:
| क्या हुआ | नियम में क्या है |
|---|---|
| TDS काटा ही नहीं | ब्याज — जितने महीने की देर, उतने महीनों का; मौजूदा नियमों में लगभग 1.5% प्रति माह |
| काट लिया पर जमा नहीं किया | ब्याज — इसी तरह, पर दर न काटने वाली चूक से ऊँची बैठती है |
| कटौती में चूक | जुर्माना — जितना TDS बनता था, उतनी ही रक़म तक लग सकता है |
| गंभीर मामले | अभियोजन (prosecution) तक, जिसमें क़ैद का प्रावधान है |
(यह आयकर नियमों के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार है; यह टैक्स सलाह नहीं है — अपनी स्थिति के लिए CA से पूछें।)
जुर्माने वाली लाइन दोबारा पढ़िए। वह उतनी ही रक़म तक हो सकती है जितना TDS आपने नहीं काटा — यानी ₹1,000 न काटने पर ₹1,000 का जुर्माना, ऊपर से ब्याज अलग। जो रक़म बचाने के लिए चूक की, वह पूरी की पूरी वापस माँगी जाती है और साथ में उतनी ही और।
यह सोचना कि पता ही नहीं चलेगा, अब पहले जैसा नहीं रहा। बैंक स्टेटमेंट में UPI का रिकॉर्ड रहता है, एक्सचेंज की अपनी रिपोर्टिंग होती है, और AIS में आपके नाम से जानकारी जुड़ती रहती है। इससे बेहतर रास्ता सीधा है और सस्ता भी: हर सौदे का ब्योरा उसी दिन लिख लीजिए — तारीख़, रक़म, सेलर का PAN, UPI reference — और साल में एक बार CA के साथ बैठकर पूरा हिसाब साफ़ कर लीजिए। दो घंटे का काम है, और यही दो घंटे इस पूरी लिस्ट को आपसे दूर रखते हैं।
एडिटोरियल नोट: ऊपर दी गई रक़में सिर्फ़ हिसाब समझाने के लिए बनाई गई हैं, किसी असली सौदे की नहीं। हम टैक्स सलाहकार नहीं हैं और यह पन्ना सलाह की जगह नहीं ले सकता — इसका मक़सद इतना है कि CA के पास जाने से पहले आपको पता हो कि पूछना क्या है। दरें, सीमाएँ और फ़ॉर्म समय के साथ बदलते हैं; अंतिम शब्द आयकर विभाग के मौजूदा नियमों का है। पूरा पन्ना जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बाइनेंस P2P पर TDS कौन काटेगा?
क्या ₹10,000 से कम के सौदे पर भी TDS लगेगा?
नुक़सान हुआ तो भी टैक्स देना पड़ेगा?
1% TDS मुनाफ़े पर लगता है या पूरी रक़म पर?
TDS नहीं काटा तो क्या होगा?
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