TDS · टैक्स कैलकुलेटर
बिक्री की रक़म और ख़रीद की लागत डालिए। 30% टैक्स, उस पर 4% health and education cess, और transfer की रक़म पर 1% TDS — तीनों अलग-अलग लाइन में, और नीचे यह कि मुनाफ़े में से जेब तक कितना पहुँचता है।
लिमिट एक सौदे की नहीं, पूरे financial year की जोड़ पर लगती है। सिर्फ़ एक सौदे का TDS देखना हो तो उसी सौदे की रक़म डालिए।
पूरा हिसाब आपके ब्राउज़र में ही होता है, कोई नंबर कहीं अपलोड नहीं होता। इस पेज पर PAN, आधार या किसी दस्तावेज़ का खाना नहीं है और न ही उसकी ज़रूरत है। दरें आयकर नियमों के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार; यह टैक्स सलाह नहीं है — अपनी स्थिति के लिए CA से पूछें।
ऊपर वाली लाइनें आपके बस में नहीं हैं — 30%, cess और 1% TDS नियम से आते हैं। जो बच सकता है वह ट्रेडिंग फ़ीस है: इनवाइट कोड BN6971 से बाइनेंस पर रजिस्टर करने पर फ़ीस में 20% छूट मिलती है, और कोड सिर्फ़ रजिस्टर करते वक़्त लगता है, बाद में नहीं जुड़ता। रजिस्टर करने से पहले देख लें कि आपके इलाके में बाइनेंस उपलब्ध है या नहीं।
बाइनेंस पर रजिस्टर करें · 20% छूटतीन लाइनें, तीन अलग हिसाब
इस पेज पर जो तीन नंबर बनते हैं, वे एक ही रक़म के तीन हिस्से नहीं हैं — तीनों अलग जगह से आते हैं, और यही उलझन की जड़ है। 30% टैक्स सिर्फ़ मुनाफ़े पर लगता है: बिक्री की क़ीमत में से ख़रीद की लागत घटाइए, जो बचा उस पर 30%। ख़रीद की क़ीमत के अलावा कुछ भी नहीं घटता — न एक्सचेंज की फ़ीस, न इंटरनेट का बिल, न वह पेड ग्रुप जिसने टिप बेची थी। 4% cess मुनाफ़े पर नहीं, बने हुए टैक्स पर लगता है; लोग इसे अक्सर छोड़ देते हैं और साल के आख़िर में नंबर मिलता नहीं। और 1% TDS मुनाफ़े को देखता ही नहीं — वह transfer की पूरी रक़म पर कटता है, चाहे उस सौदे में आपने कमाया हो या गँवाया।
इसीलिए ऊपर तीन खाने अलग हैं। ख़रीद और बिक्री वाले खाने 30% और cess बनाते हैं; TDS वाला खाना अपनी अलग रक़म पढ़ता है, क्योंकि वह मुनाफ़े से जुड़ा ही नहीं है। पूरा गणित उदाहरणों समेत TDS और टैक्स वाली गाइड में खोला गया है; प्रतिशत का हिसाब अलग से समझना हो तो प्रॉफ़िट-लॉस का प्रतिशत कैसे निकालें देख लीजिए।
cess लगने के बाद असरदार दर 30% नहीं रहती
एक हिसाब देखिए, वही जो ऊपर डिफ़ॉल्ट में भरा है। ₹1,00,000 की लागत, ₹1,50,000 की बिक्री — मुनाफ़ा ₹50,000। उस पर 30% यानी ₹15,000 टैक्स बना। अब cess उन्हीं ₹15,000 का 4% है, यानी ₹600, इसलिए कुल ₹15,600 बैठा। मुनाफ़े के हिसाब से देखें तो यह 30% नहीं, 31.2% हुआ। रक़म बड़ी हो तो यह 1.2% अपने आप बड़ा होता जाता है। ऊँची आमदनी पर लागू surcharge इसके ऊपर अलग बैठ सकता है, और वह इस कैलकुलेटर में जुड़ा नहीं है क्योंकि वह आपकी कुल आमदनी पर टिका है, इस एक सौदे पर नहीं।
नुकसान पर टैक्स 0 है, राहत भी 0
नुकसान वाली रक़म डालिए तो टैक्स की लाइन शून्य दिखेगी, और यहीं एक ग़लतफ़हमी बनती है कि चलो घाटा तो टैक्स में एडजस्ट हो जाएगा। नहीं होता। मौजूदा प्रावधानों के तहत इस नुकसान को न किसी और मुनाफ़े से set-off कर सकते हैं, न अगले साल carry forward। दूसरे कॉइन में हुआ मुनाफ़ा इससे कम नहीं होगा, सैलरी से घटाने का सवाल ही नहीं, और साल ख़त्म होते ही घाटा भी ख़त्म — शेयरों वाला सहारा यहाँ है ही नहीं।
इसका असर एक उदाहरण में साफ़ दिखता है। एक सौदे में ₹50,000 कमाए, दूसरे में ₹50,000 गँवाए। जोड़ में आप ठीक बराबरी पर हैं, पर टैक्स कमाई वाले सौदे पर बनेगा — ₹15,600, cess समेत। यानी साल भर बराबरी पर रहकर भी जेब से ₹15,600 गए। हमने ख़ुद यह गिनती करते वक़्त पहली बार यही मान लिया था कि दोनों आपस में कट जाएँगे, और यह मान लेना ही सबसे महँगा हिस्सा था। बहुत सारे छोटे-छोटे सौदे करने पर यह मार दोहरी हो जाती है: हर बिक्री पर 1% TDS अलग से घिसता है और हर मुनाफ़े वाले सौदे पर 30% चढ़ता है, जबकि घाटे वाले चुपचाप निगल लिए जाते हैं।
लिमिट: ₹50,000 और ₹10,000
हर छोटे सौदे पर TDS न लगे, इसके लिए एक सीमा है — पर वह सबके लिए एक जैसी नहीं। जिन्हें नियम specified person कहता है, उनके लिए financial year में ₹50,000 तक की कुल रक़म पर TDS नहीं लगता। यह श्रेणी उससे चौड़ी है जितनी लोग समझते हैं: इसमें वह व्यक्ति या HUF आते हैं जिनका पिछले financial year में कारोबार का turnover ₹1 crore से ऊपर न गया हो, या पेशे की receipts ₹50 lakh से ऊपर न गई हों — और वे भी जिनकी कारोबार या पेशे से कोई आमदनी है ही नहीं। यानी छोटी दुकान या फ़्रीलांस प्रैक्टिस चलाने वाला भी इसमें आ सकता है, सिर्फ़ सैलरी वाला ही नहीं। बाक़ी सबके लिए — कंपनी, फ़र्म, और इन सीमाओं से ऊपर वाले — लिमिट ₹10,000 है। आपकी अपनी स्थिति आपकी आमदनी के ढाँचे पर टिकी है, यही तय कराने के लिए CA है।
यह एक सौदे की नहीं, पूरे financial year की जोड़ है। ₹9,000 वाला एक सौदा अकेला छोटा है, पर साल भर में ऐसे दस कर लिए तो जोड़ सीमा पार कर जाएगा।
सीमा पार होते ही TDS पूरी रक़म पर लगता है, सिर्फ़ ऊपर वाले हिस्से पर नहीं। यह income tax के slab जैसा नहीं है। दरवाज़ा पार किया तो पूरा सौदा दायरे में है।
ठीक लिमिट पर कटौती नहीं होती। नियम की भाषा «इससे ऊपर न जाए» वाली है — यानी साल की जोड़ ठीक ₹50,000 (या ₹10,000) रही तो TDS शून्य; कटौती तभी शुरू होती है जब जोड़ इस आँकड़े से आगे निकले।
(आयकर नियमों के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार; यह टैक्स सलाह नहीं है — अपनी स्थिति के लिए CA से पूछें।)
P2P पर काटने वाला ख़रीदार है, प्लेटफ़ॉर्म नहीं
CoinDCX या WazirX जैसे भारतीय एक्सचेंज पर TDS की चिंता नहीं करनी पड़ती — वे बीच में खड़े होकर ख़ुद काटते हैं, ख़ुद जमा करते हैं, और आपको स्टेटमेंट मिल जाता है। बाइनेंस P2P पर ऐसा नहीं होता। वहाँ सौदा दो लोगों के बीच सीधा है और प्लेटफ़ॉर्म सिर्फ़ escrow रखता है, इसलिए काटने की ज़िम्मेदारी उस पर आती है जो पैसा दे रहा है — यानी ख़रीदार पर। USDT ख़रीदते वक़्त वह ख़रीदार आप हैं।
करने में यह इतना है: सेलर का PAN लेना (उसके बिना फ़ॉर्म भरा ही नहीं जाएगा, और PAN न मिलने पर नियमों में ऊँची दर से काटने का प्रावधान है), कुल रक़म का 1% काटना, फिर उसे जमा करना। यहाँ एक बदलाव है जो अभी तक ज़्यादातर जगह अपडेट नहीं हुआ: 1 अप्रैल 2026 से पुराने Form 26QE और Form 16E अलग से नहीं रहे — उनकी जगह Form 141 और Form 132 ने ले ली है। तारीख़ें दो हैं और दोनों असली हैं:
Form 132 — पहले वाला 16E। Form 141 की आख़िरी तारीख़ से 15 दिन के अंदर सेलर को देना है। यह उसका सर्टिफ़िकेट है कि उसका TDS कटकर जमा हो चुका है — और यह आप हाथ से नहीं बनाते: यह TRACES पोर्टल से generate होता है, और Form 141 भर लेने के बाद ही बनेगा। (आयकर विभाग का फ़ॉर्म सेक्शन)
(आयकर नियमों के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार; यह टैक्स सलाह नहीं है — अपनी स्थिति के लिए CA से पूछें।)
व्यावहारिक उलझन यह है कि सेलर पूरी रक़म माँगता है और नियम आपसे 1% रोककर जमा करने को कहता है। यह बात हर सेलर के साथ पहले तय करनी पड़ती है, और बहुत लोग इसे टालकर पूरा पैसा भेज देते हैं और फिर भूल जाते हैं — चूक उनके नाम दर्ज होती है, सेलर के नहीं। सौदे कम और बड़े रखना और हर सौदे का ब्योरा उसी दिन लिख लेना (तारीख़, रक़म, सेलर का PAN, UPI reference) इस काम को संभालने लायक़ बना देता है। रजिस्टर करने से पहले पूरा रास्ता देखना हो तो बाइनेंस अकाउंट कैसे बनाएँ में स्टेप दर स्टेप है।
यह कैलकुलेटर क्या नहीं करता
चार चीज़ें इसके दायरे से बाहर हैं। पहली, surcharge — वह आपकी कुल आमदनी पर टिका है, किसी एक सौदे पर नहीं, इसलिए यहाँ नहीं जुड़ा। दूसरी, TDS को घटाकर दोबारा नहीं गिना गया: ऊपर वाली TDS लाइन कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं है, वह आपके नाम जमा होकर टैक्स स्टेटमेंट में दिखती है — अभी वाली ITR (AY 2026-27) के लिए Form 26AS में, और 1 अप्रैल 2026 से हुए लेन-देन नए नियमों के तहत Form 168 (AIS) में, जो 2027 वाली ITR के वक़्त सामने आएगा — और ITR भरते वक़्त वह कुल देनदारी में एडजस्ट हो जाती है; ज़्यादा कटा हो तो रिफ़ंड बनता है। इसीलिए हाथ में वाली लाइन में TDS दोबारा नहीं घटाया गया, वरना एक ही पैसा दो बार कट जाता। तीसरी, फ़ीस और P2P का प्रीमियम या डिस्काउंट — बाइनेंस पर INR का सीधा चैनल नहीं है, तो बेचते वक़्त असली भाव बाज़ार की दर से ऊपर-नीचे रहता है, और वह फ़र्क़ यहाँ नहीं दिखता। चौथी, आपकी अपनी परिस्थिति: गिफ़्ट, mining, staking, airdrop और एक साल से पुराने रिकॉर्ड सबके अपने पेच हैं। यहाँ जो बना है उसे CA के पास जाने से पहले की तैयारी मानिए, आख़िरी शब्द नहीं। यह पूरा पेज आयकर नियमों के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार है; यह टैक्स सलाह नहीं है — अपनी स्थिति के लिए CA से पूछें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1% TDS मुनाफ़े पर लगता है या पूरी रक़म पर?
नुकसान हुआ तो टैक्स 0 है, फिर भी कुछ खटकता क्यों है?
4% cess किस पर लगता है — मुनाफ़े पर या टैक्स पर?
बाइनेंस P2P पर 1% TDS कौन काटेगा?
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