टारगेट प्राइस निकालें
पहले यह तय कीजिए कि इस सौदे से कितना कमाना है, फिर उल्टा चलकर बेचने का भाव निकालिए। खरीद भाव और चाहिए मुनाफ़ा भरते ही टारगेट भाव और ज़रूरी उछाल सामने आ जाते हैं।
पूरी गिनती आपके अपने ब्राउज़र में होती है, नंबर कहीं अपलोड नहीं होते। नतीजा spot के हिसाब से है और इसमें फ़ीस नहीं जुड़ी — हाथ में आने वाली रकम में बेचने की फ़ीस और टैक्स अलग से घटेंगे।
इनवाइट कोड BN6971 से बाइनेंस पर रजिस्टर करने पर ट्रेडिंग फ़ीस में 20% छूट मिलती है। यह इनवाइट लिंक है — इससे रजिस्टर करने पर आपको फ़ीस में छूट मिलती है; हमें कमीशन मिलता है, आपकी फ़ीस पर इसका कोई असर नहीं पड़ता।
बाइनेंस पर रजिस्टर करें · 20% छूटयह कैलकुलेटर करता क्या है
ज़्यादातर लोग खरीदते वक़्त बस इतना सोचते हैं कि चढ़ेगा — यह नहीं सोचते कि कहाँ पहुँचकर निकल जाना है। यह टूल उसी क्रम को उल्टा कर देता है: पहले तय कीजिए कि कितने % का मुनाफ़ा चाहिए, टूल बता देगा किस भाव पर बेचना पड़ेगा। फ़ॉर्मूला सीधा है — टारगेट भाव = खरीद भाव × (1 + मुनाफ़ा%)। ₹20 पर लिया और 30% चाहिए, तो ₹26 पर बेचना है। ऊपर मात्रा भी भर दीजिए तो यह भी दिख जाएगा कि टारगेट पर पहुँचने पर लगभग कितने पैसे बनेंगे। भाव किसी भी यूनिट में डालिए — USDT हो या ₹, गिनती वही रहेगी, नतीजा उसी यूनिट में आएगा। और यह सब आपके अपने ब्राउज़र में होता है, आपके नंबर कहीं नहीं जाते।
मुनाफ़ा % और उछाल % एक ही नंबर क्यों हैं
आपने देखा होगा कि मुनाफ़ा 30% भरने पर ज़रूरी उछाल भी 30% ही आता है। spot में, बिना leverage के, यह ऐसा ही रहेगा — भाव जितना चढ़ेगा, आप उतना ही कमाएँगे। इसे अलग से इसलिए दिखाया जाता है ताकि उस उछाल का आकार महसूस हो। पैसा दोगुना करना है तो भाव को 100% चढ़ना है; 5 गुना करना है तो 400%। मुनाफ़ा % में बड़ा नंबर डालकर देखिए, कुछ उम्मीदें अपने आप बेतुकी लगने लगेंगी। ये दोनों सिर्फ़ futures यानी leverage में अलग होते हैं — 5x पर भाव 6% चढ़े तो मुनाफ़ा करीब 30% बनता है, लेकिन उलटी दिशा में नुकसान और liquidation का ख़तरा भी उतना ही गुना हो जाता है।
कागज़ का 30% और हाथ का 30% एक नहीं होते
एक बात यह कैलकुलेटर नहीं जानता: जो टारगेट यह निकालता है वह कागज़ पर है। ₹1,00,000 का लिया और 30% पर बेचा तो स्क्रीन पर ₹30,000 का फ़ायदा दिखेगा — पर भारत में क्रिप्टो से हुए फ़ायदे पर 30% टैक्स लगता है, और बेचते वक़्त 1% TDS भी कटता है। ऊपर से, किसी दूसरे कॉइन में हुआ घाटा इस फ़ायदे में से घटाया नहीं जा सकता, यानी सेट-ऑफ़ का सहारा भी नहीं है। तो हाथ में ₹30,000 चाहिए होना और स्क्रीन पर 30% दिखना — ये दो अलग बातें हैं, और टारगेट बाँधते वक़्त यह फ़र्क़ दिमाग़ में रखना पड़ता है। (यह आयकर नियमों के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार है; यह टैक्स सलाह नहीं है — अपनी स्थिति के लिए CA से पूछें।) पूरा हिसाब TDS और टैक्स में लिखा है, और मोटा अंदाज़ा TDS · टैक्स कैलकुलेटर से लग जाएगा। बाकी यह साफ़ रहे कि टारगेट तय करने का फ़ायदा अनुशासन है, गारंटी नहीं — भाव वहाँ पहुँचेगा या नहीं, यह कोई टूल नहीं बता सकता। एक आम गलती यह भी है: 30% पास आते ही जोश में टारगेट 50% कर देना, फिर भाव लौट जाता है और हाथ कुछ नहीं आता। टारगेट इसीलिए तय किया जाता है कि आज का ठंडा दिमाग़ कल के गरम दिमाग़ के लिए फ़ैसला कर दे। साथ में प्रॉफ़िट/लॉस · ब्रेकईवन भी चला लीजिए — एक निकलना संभालता है, दूसरा नुकसान।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
टारगेट भाव निकलता कैसे है?
कैलकुलेटर जो मुनाफ़ा दिखाता है, वही हाथ में आता है क्या?
टारगेट तय कर लिया मतलब भाव वहाँ पहुँचेगा ही?
मिलते-जुलते टूल: प्रॉफ़िट/लॉस · ब्रेकईवन · होल्डिंग की वैल्यू · ATH से कितना नीचे · प्राइस कन्वर्टर